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"item_author" : [" कुमार "],
"item_description" : "स्रष्टा' काव्य संग्रह की सभी कविताएं मेरे जीवन के आत्मिक अनुभव से जुड़ी हुई है। इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए कल्पना का बहुत अधिक आश्रय लिया गया हो। पहली कविता 'मौन' की कहानी यह है कि नवरात्रि में नौ दिन मौन रहा और इसी का प्रतिफल काव्य के रूप में आया। ऐसे ही 'जम से पड़ा झमेला', 'कला पुरुष', 'आत्मराग', 'अस्सी घाट' जैसी कविताएं भी गहरे आत्ममंथन की उपज है। इस संग्रह की कविताओं में एक भावुक हृदय को ना समझे जाने का विक्षोभ भी है। आत्मधिक्कार और आत्म-परिष्कार दोनों यहां देखने को मिल जाते हैं। आचार्य शुक्ल जी के शब्दों में कहें तो विरुद्धों का आत्मसामंजस्य जैसा कुछ-कुछ मामला है। कुछ कविताओं में आस-पास के परिवेश और कुछ में प्रकृति के नैसर्गिक स्वरूप में झांकने की भी बालसुलभ चेष्टा की गई है।",
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Overview
स्रष्टा' काव्य संग्रह की सभी कविताएं मेरे जीवन के आत्मिक अनुभव से जुड़ी हुई है। इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए कल्पना का बहुत अधिक आश्रय लिया गया हो। पहली कविता 'मौन' की कहानी यह है कि नवरात्रि में नौ दिन मौन रहा और इसी का प्रतिफल काव्य के रूप में आया। ऐसे ही 'जम से पड़ा झमेला', 'कला पुरुष', 'आत्मराग', 'अस्सी घाट' जैसी कविताएं भी गहरे आत्ममंथन की उपज है। इस संग्रह की कविताओं में एक भावुक हृदय को ना समझे जाने का विक्षोभ भी है। आत्मधिक्कार और आत्म-परिष्कार दोनों यहां देखने को मिल जाते हैं। आचार्य शुक्ल जी के शब्दों में कहें तो विरुद्धों का आत्मसामंजस्य जैसा कुछ-कुछ मामला है। कुछ कविताओं में आस-पास के परिवेश और कुछ में प्रकृति के नैसर्गिक स्वरूप में झांकने की भी बालसुलभ चेष्टा की गई है।
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Details
- ISBN-13: 9781807156909
- ISBN-10: 1807156907
- Publisher: Bookleaf Publishing
- Publish Date: December 2025
- Dimensions: 8 x 5 x 0.1 inches
- Shipping Weight: 0.13 pounds
- Page Count: 50
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