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व : िश्नोई संतकवियों द्वार&

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Overview

भारतीय साहित्य परम्परा में आख्यान एक अत्यंत समृद्ध और लोकप्रिय विधा है, जो आख्यानों पर लोककथाओं और लोक परंपराओं का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। भारतीय आख्यान परंपरा में राम और ष्ण के दो मुख्य अवतारों की कल्पना व्यापक रूप से विद्यमान रही है, जिनके आदर्श चरित्रों को आधार बनाकर भारतीय वाङ्मय में अत्यधिक काव्य सर्जना हुई है। विभिन्न पंथों और संप्रदायों के संतकवियों ने भी इस परंपरा को समृद्ध किया है। राजस्थान की भूमि पर विक्रम की सोलहवीं शताब्दी में गुरु जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित विश्नोई पंथ में भी पौराणिक आख्यानों पर आधारित संत साहित्य की सृजन परंपरा ष्टिगत होती है। प्रस्तुत पुस्तक में गुरु जाम्भोजी का संक्षिप्त जीवनवृत्त, धार्मिक ष्टिकोण तथा राम और ष्ण अवतारों के प्रति उनकी मान्यताओं का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में विश्नोई पंथ के सात प्रमुख संतकवियों मेहोजी गोदारा, सुरजनदास पूनिया, पद्म भगत, रामलला, केसौदास गोदारा, डेल्हजी एवं ऊदोजी अड़ींगकी दस रचनाओं का उपजीव्य ग्रंथों के आलोक में विवेचनात्मक अध्ययन किया गया है। मेहोजी गोदारा की रामायण, सुरजनदास पूनिया की रामरासौ, तथा पद्म भगत व रामलला की रुक्मिणी मंगल ë

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Details

  • ISBN-13: 9781998027255
  • ISBN-10: 1998027252
  • Publisher: PC Plus Ltd.
  • Publish Date: August 2025
  • Dimensions: 8.5 x 5.5 x 0.69 inches
  • Shipping Weight: 1.05 pounds
  • Page Count: 286

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