Overview
'मुक्त से स्मृति तक' महज एक उपन्यास नहीं बल्कि यह स्मृतियों के उस गहरे और दमघोंटू संग्रहालय की एक रूहानी यात्रा है जहाँ एक प्रेमी अपनी खोई हुई मोहब्बत के हर एक कतरे को डिजिटल फाइलों और बाइनरी कोड्स में संजोने की जिद में स्वयं को ही विस्मृत कर बैठता है। सम्राट सिंह ने इस रचना में उस पीड़ा का गहरा विवरण प्रस्तुत किया है जहाँ नायक अपनी प्रेमिका की हंसी के एक-एक डेसीबल को समय की दीमकों से बचाने के लिए एक डेटा एंट्री ऑपरेटर की भांति दिन-रात एक कर देता है मगर अंततः उसे यह बोध होता है कि प्रेम को कैद करने की हर कोशिश उसे उसकी वास्तविक रूह से दूर ले जा रही है। यह कहानी अद्वैत के उस जटिल दर्शन को विरह की अग्नि में तपाकर एक नवीन स्वरूप प्रदान करती है जहाँ प्रेम केवल स्मृतियों का एक भारी-भरकम संचय मात्र नहीं रह जाता बल्कि रूपांतरित होकर रूह पर पड़ी उस दरार की भांति बन जाता है जहाँ से अस्तित्व का वास्तविक प्रकाश भीतर प्रवेश करता है।
इस उपन्यास का हर एक पृष्ठ उस महासंग्राम का साक्षी है जिसमें नायक अपने डिजिटल ब्रह्मांड को महज पाँच सौ रुपये में त्यागकर उस स्टेशन की पटरियों, पीले रुमाल और एक गुब्बारे के पीछे भागते बच्चे के निश्छल आनंद में अपनी मुक्ति की खोज करता है। सम्राट सिंह ने अत्यंत मार्मिक ढंग से रेखांकित किया है कि कैसे त्याग ही वह प्रथम स्वतंत्र श्वास है जो मनुष्य को काल के बोझ से मुक्त करती है और उसे इस सत्य से साक्षात्कार कराती है कि शून्यता भी वास्तव में एक प्रकार का अधिवास है जहाँ मनुष्य सुकून की सांस ले सकता है। यह एक ऐसी साहित्यिक कृति है जो हमें बोध कराती है कि प्रत्येक दास्तान का समापन किसी भव्य स्मारक पर होना अनिवार्य नहीं है क्योंकि कदाचित किसी कथा का अधूरापन ही उसकी चरमोत्कर्ष पूर्णता बन जाता है और
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Details
- ISBN-13: 9788199611542
- ISBN-10: 8199611545
- Publisher: Samraat Singh
- Publish Date: March 2026
- Dimensions: 8.5 x 5.5 x 0.21 inches
- Shipping Weight: 0.25 pounds
- Page Count: 88
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