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"item_title" : "ज",
"item_author" : [" ह हकीम "],
"item_description" : "यह कविता-संग्रह हिंदुस्तानी भाषा में है। जब हिंदी की सुंदरता और सरलता, उर्दू के अदब-ओ-नज़ाकत से मिलती हैं, तो दिल की बोली बन जाती है-और उसी बोली को हिंदुस्तानी कहा जाता है। लिपि देवनागरी है, लेकिन आप अक्सर उर्दू लफ़्ज़ों से भी रूबरू होंगे। आप घबराएँ नहीं; आपकी आसानी के लिए कठिन शब्दों के अर्थ साथ-साथ दिए गए हैं। इस संग्रह की रचनाओं को मैंने तीन भागों में बाँटा है। पहले भाग की कविताएँ अपनी तर्ज़ पर स्वयं बोलती हैं-इसलिए उनके बारे में मैं कुछ नहीं कहूँगी। दूसरे भाग में आज़ाद नज़्में और कविताएँ शामिल हैं, जो अलग-अलग भावों और एहसासों को छूती हैं; इनमें कुछ सामाजिक विषयों पर भी हैं। तीसरे भाग में चुनिंदा ग़ज़लें संकलित की गई हैं।",
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Overview
यह कविता-संग्रह हिंदुस्तानी भाषा में है। जब हिंदी की सुंदरता और सरलता, उर्दू के अदब-ओ-नज़ाकत से मिलती हैं, तो दिल की बोली बन जाती है-और उसी बोली को हिंदुस्तानी कहा जाता है। लिपि देवनागरी है, लेकिन आप अक्सर उर्दू लफ़्ज़ों से भी रूबरू होंगे। आप घबराएँ नहीं; आपकी आसानी के लिए कठिन शब्दों के अर्थ साथ-साथ दिए गए हैं। इस संग्रह की रचनाओं को मैंने तीन भागों में बाँटा है। पहले भाग की कविताएँ अपनी तर्ज़ पर स्वयं बोलती हैं-इसलिए उनके बारे में मैं कुछ नहीं कहूँगी। दूसरे भाग में आज़ाद नज़्में और कविताएँ शामिल हैं, जो अलग-अलग भावों और एहसासों को छूती हैं; इनमें कुछ सामाजिक विषयों पर भी हैं। तीसरे भाग में चुनिंदा ग़ज़लें संकलित की गई हैं।
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Details
- ISBN-13: 9789373141244
- ISBN-10: 9373141244
- Publisher: Bookleaf Publishing
- Publish Date: March 2026
- Dimensions: 8 x 5 x 0.24 inches
- Shipping Weight: 0.27 pounds
- Page Count: 116
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