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"item_author" : [" चावड़ा "],
"item_description" : "मानव-संतान मौलिक रूप से जिज्ञासु है। इसी जिज्ञासावश मानव आवश्यकतानुसार अस्तित्व की वास्तविकताओं का अध्ययन करता है। जिज्ञासावश ही मनुष्य विचारशील व चिंतनशील है। आदिकाल से ही मनुष्य प्रकृति के रहस्यों को समझने का प्रयास करता आ रहा है। इसी प्रयास में मानव द्वारा शिक्षा के दो प्रयोगों को वैचारिक रूप से, शैक्षिक रूप से और पारिवारिक रूप से प्रयोग किया गया। आदर्शवादी चिंतन के मूल में अस्तित्व का जो अध्ययन किया गया, उसमें अध्ययन के मूल में किसी ईश्वरीय या परम सत्ता जैसी वास्तविकता को स्वीकार किया गया, परंतु वर्तमान समय तक आदर्शवादी चिंतन-धारा ऐसी किसी भी वास्तविकता से मानव-जाति का परिचय नहीं करा पाई।",
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Overview
मानव-संतान मौलिक रूप से जिज्ञासु है। इसी जिज्ञासावश मानव आवश्यकतानुसार अस्तित्व की वास्तविकताओं का अध्ययन करता है। जिज्ञासावश ही मनुष्य विचारशील व चिंतनशील है। आदिकाल से ही मनुष्य प्रकृति के रहस्यों को समझने का प्रयास करता आ रहा है। इसी प्रयास में मानव द्वारा शिक्षा के दो प्रयोगों को वैचारिक रूप से, शैक्षिक रूप से और पारिवारिक रूप से प्रयोग किया गया। आदर्शवादी चिंतन के मूल में अस्तित्व का जो अध्ययन किया गया, उसमें अध्ययन के मूल में किसी ईश्वरीय या परम सत्ता जैसी वास्तविकता को स्वीकार किया गया, परंतु वर्तमान समय तक आदर्शवादी चिंतन-धारा ऐसी किसी भी वास्तविकता से मानव-जाति का परिचय नहीं करा पाई।
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Details
- ISBN-13: 9781794744080
- ISBN-10: 1794744088
- Publisher: Lulu.com
- Publish Date: November 2019
- Dimensions: 9 x 6 x 0.18 inches
- Shipping Weight: 0.25 pounds
- Page Count: 76
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