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"item_description" : "झरोखा' कवयित्री के दिल की वो खिड़की है जिसे वो किसी के लिए नहीं खोलती। वह चाहती है कोई झाँके तो सही परन्तु समझे ना उन बातों को जिन्हें वह यहाँ छुपा कर रखती है। अपनी बातें, लोगों की बातें, कुछ घर की बातें, कुछ बाहर की बातें। यह सब जब मिल जाती हैं तो कागज़ पर उतर आती हैं। उन्ही कागज़ के पन्नों को समेट कर बनी है यह किताब। क्यूँ बनी है? यह तो शायद मालूम नहीं। लेकिन किसके लिए बनी है? इसका जवाब सरल सा है, आप सब के लिए। पर यहाँ भी एक शर्त है, इन पन्नों को आप कैसे और किस कदर समझते हैं, महसूस करते हैं, यह बुनियादी तौर पर सिर्फ और सिर्फ आप पर निर्भर करता है। तो चलिए देखते हैं, इन पन्नों पर उतरा कौन सा हर्फ़ किस पर कितना असर करता है।",
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Overview
झरोखा' कवयित्री के दिल की वो खिड़की है जिसे वो किसी के लिए नहीं खोलती। वह चाहती है कोई झाँके तो सही परन्तु समझे ना उन बातों को जिन्हें वह यहाँ छुपा कर रखती है। अपनी बातें, लोगों की बातें, कुछ घर की बातें, कुछ बाहर की बातें। यह सब जब मिल जाती हैं तो कागज़ पर उतर आती हैं। उन्ही कागज़ के पन्नों को समेट कर बनी है यह किताब। क्यूँ बनी है? यह तो शायद मालूम नहीं। लेकिन किसके लिए बनी है? इसका जवाब सरल सा है, आप सब के लिए। पर यहाँ भी एक शर्त है, इन पन्नों को आप कैसे और किस कदर समझते हैं, महसूस करते हैं, यह बुनियादी तौर पर सिर्फ और सिर्फ आप पर निर्भर करता है। तो चलिए देखते हैं, इन पन्नों पर उतरा कौन सा हर्फ़ किस पर कितना असर करता है।
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Details
- ISBN-13: 9789372133950
- ISBN-10: 9372133957
- Publisher: Bookleaf Publishing
- Publish Date: August 2025
- Dimensions: 8 x 5 x 0.12 inches
- Shipping Weight: 0.14 pounds
- Page Count: 56
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