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"item_author" : [" डॉ. सचिन & "],
"item_description" : "कच्ची कला में शायद आपको कोई मंज़िल न मिले, पर एक सफ़र ज़रूर दिखाई देगा - एक ऐसा सफ़र, जो कहीं पहुँचने की बेताब फिराक में है। यह किताब उन रिश्तों की पगडंडियों से गुज़रती है, जो हमें बनाते और संवारते हैं; चाहे वह माँ-बाप का साया हो, भाई का साथ, पत्नी का अटूट विश्वास हो या बच्चों की मासूमियत। इसमें दोस्तों की महफ़िलें भी हैं और महबूब का ज़िक्र भी। इसमें दर्ज हर कविता महज़ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि एक 'किस्सागोई' है। ये वो कहानियाँ हैं जो देखीं, महसूस कीं या जी हैं। इसमें कुछ काल्पनिक रंग हैं, तो कुछ हकीकत की कड़वाहट और मिठास। इस सफर का कुछ हिस्सा आपको अपना लगेगा, तो कुछ में केवल आप गवाह लगेंगे।",
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Overview
"कच्ची कला" में शायद आपको कोई मंज़िल न मिले, पर एक सफ़र ज़रूर दिखाई देगा - एक ऐसा सफ़र, जो कहीं पहुँचने की बेताब फिराक में है। यह किताब उन रिश्तों की पगडंडियों से गुज़रती है, जो हमें बनाते और संवारते हैं; चाहे वह माँ-बाप का साया हो, भाई का साथ, पत्नी का अटूट विश्वास हो या बच्चों की मासूमियत। इसमें दोस्तों की महफ़िलें भी हैं और महबूब का ज़िक्र भी। इसमें दर्ज हर कविता महज़ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि एक 'किस्सागोई' है। ये वो कहानियाँ हैं जो देखीं, महसूस कीं या जी हैं। इसमें कुछ काल्पनिक रंग हैं, तो कुछ हकीकत की कड़वाहट और मिठास। इस सफर का कुछ हिस्सा आपको अपना लगेगा, तो कुछ में केवल आप गवाह लगेंगे।
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Details
- ISBN-13: 9789375430599
- ISBN-10: 9375430596
- Publisher: Bookleaf Publishing
- Publish Date: May 2026
- Dimensions: 8 x 5 x 0.09 inches
- Shipping Weight: 0.11 pounds
- Page Count: 42
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