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"item_description" : "मनमंजरी शब्दों की छाँव में पनपा एक ऐसा संकलन है, जो लेखक की जीवन यात्रा, अनुभवों और संवेदनाओं को प्रतिबिंबित करता है। यह किताब केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक आत्मिक सफर है, जिसमें लेखक ने अपने मन के भावों को शब्दों में पिरोया है। एक इंजीनियर होते हुए भी साहित्य के प्रति गहरे लगाव ने उन्हें हिंदी और उर्दू भाषा में लेखन की ओर प्रेरित किया। यह पुस्तक उनकी उन अधपकी कविताओं से लेकर अब तक की साहित्यिक यात्रा को दर्शाती है। मनमंजरी में प्रेम, विरह, समाज, आत्ममंथन और जीवन के विभिन्न रंगों को भावनात्मक अभिव्यक्ति दी गई है।",
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म : नमंजरी
Overview
मनमंजरी शब्दों की छाँव में पनपा एक ऐसा संकलन है, जो लेखक की जीवन यात्रा, अनुभवों और संवेदनाओं को प्रतिबिंबित करता है। यह किताब केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक आत्मिक सफर है, जिसमें लेखक ने अपने मन के भावों को शब्दों में पिरोया है। एक इंजीनियर होते हुए भी साहित्य के प्रति गहरे लगाव ने उन्हें हिंदी और उर्दू भाषा में लेखन की ओर प्रेरित किया। यह पुस्तक उनकी उन अधपकी कविताओं से लेकर अब तक की साहित्यिक यात्रा को दर्शाती है। मनमंजरी में प्रेम, विरह, समाज, आत्ममंथन और जीवन के विभिन्न रंगों को भावनात्मक अभिव्यक्ति दी गई है।
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Details
- ISBN-13: 9789369548354
- ISBN-10: 9369548351
- Publisher: Bookleaf Publishing
- Publish Date: April 2025
- Dimensions: 8 x 5 x 0.16 inches
- Shipping Weight: 0.18 pounds
- Page Count: 76
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