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स : ाँवरे की बावरी (Sanware Ki Bawari)
Overview
जीवन यात्रा में मैं से बावरी तक का सफ़र - जब हम प्रभु की तरफ़ एक कदम बढ़ाते हैं, तो प्रभु हमारी तरफ़ हज़ार कदम बढ़ाते हैं। जिसे ठाकुर जी स्वयं अपनी लीला एवं संकेतों के माध्यम से हमारा पथ प्रशस्त करते हैं। और जब पूर्ण समर्पण हो जाता है, तो उस दिव्य आनंद से सराबोर कर देते हैं, जिससे ये मन बावरा हो जाता है। और हर तरफ़ बस हमारे प्राणधन (ठाकुर जी) नज़र आते हैं। इस परम आनंद की अनुभूति ईश्वर के चरणों में निःस्वार्थ प्रेम के फलस्वरूप होती है।
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Details
- ISBN-13: 9789374265277
- ISBN-10: 9374265273
- Publisher: Orangebooks Publication
- Publish Date: December 2025
- Dimensions: 8 x 5 x 0.12 inches
- Shipping Weight: 0.13 pounds
- Page Count: 50
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