menu
{ "item_title" : "Parikshaguru", "item_author" : [" Lala Shreenivas Das "], "item_description" : "इस पुस्तकमैं दिल्लीके एक कल्पित (फर्जी) रईसका चित्र उतारा गया है और उस्को जैसैका तैसा (अर्थात स्वाभाविक) दिखानेंके लिए संस्कृत अथवा फ़ारसी अरबीके कठिन, कठिन शब्दोंकी बनाई हुई भाषा के बदले दिल्लीके रहनेवालों की साधारण बोलचालपर ज्यादाः दृष्टि रक्खी गई है। अलबत्ता जहाँ कुछ विद्याविषय आगया है। वहाँ विवश होकर कुछ, कुछ शब्द संस्कृत आदिके लेनें पड़े हैं परन्तु जिनको ऐसी बातों के समझनेमैं कुछ झमेला मालूम हो उन्की सुगमताके लिये ऐसै प्रकरणोंपर ऐसा चिह्न लगा दिया गया है जिस्सै उन प्रकरणोंको छोड़कर हरेक मनुष्य सिलसिले वार वृतान्त पढ़ सक्ता है। इस पुस्तकमैं संस्कृत, फ़ारसी, अङ्ग्रेजीकी कविताका तर्जुमा अपनी भाषा के छन्दों में हुआ है परन्तु छन्दोंके नियम और दूसरे देशोंका चाल चलन जुदा होनेकी कठिनाई से पूरा तर्जुमा करनेके बदले कहीं, कहीं भावार्थ ले लिया गया है। अब इस पुस्तकके गुणदोषों पर विशेष विचार करनेंका काम बुद्धिमानोंकी बुद्धिपर छोड़कर मैं केवल इतनी बात निवेदन किया चाहता हूँ कि कृपाकरके कोई महाशय पूरी पुस्तक बांचे बिना अपना बिचार प्रकट करनेंकी जल्दी न करें और जो सज्जन इस विषयमैं अपना बिचार प्रकट करें वह कृपाकर", "item_img_path" : "https://covers2.booksamillion.com/covers/bam/9/35/682/541/9356825416_b.jpg", "price_data" : { "retail_price" : "16.99", "online_price" : "16.99", "our_price" : "16.99", "club_price" : "16.99", "savings_pct" : "0", "savings_amt" : "0.00", "club_savings_pct" : "0", "club_savings_amt" : "0.00", "discount_pct" : "10", "store_price" : "" } }
Parikshaguru|Lala Shreenivas Das

Parikshaguru

local_shippingShip to Me
In Stock.
FREE Shipping for Club Members help

Overview

"इस पुस्तकमैं दिल्लीके एक कल्पित (फर्जी) रईसका चित्र उतारा गया है और उस्को जैसैका तैसा (अर्थात स्वाभाविक) दिखानेंके लिए संस्कृत अथवा फ़ारसी अरबीके कठिन, कठिन शब्दोंकी बनाई हुई भाषा के बदले दिल्लीके रहनेवालों की साधारण बोलचालपर ज्यादाः दृष्टि रक्खी गई है। अलबत्ता जहाँ कुछ विद्याविषय आगया है। वहाँ विवश होकर कुछ, कुछ शब्द संस्कृत आदिके लेनें पड़े हैं परन्तु जिनको ऐसी बातों के समझनेमैं कुछ झमेला मालूम हो उन्की सुगमताके लिये ऐसै प्रकरणोंपर ऐसा चिह्न लगा दिया गया है जिस्सै उन प्रकरणोंको छोड़कर हरेक मनुष्य सिलसिले वार वृतान्त पढ़ सक्ता है। इस पुस्तकमैं संस्कृत, फ़ारसी, अङ्ग्रेजीकी कविताका तर्जुमा अपनी भाषा के छन्दों में हुआ है परन्तु छन्दोंके नियम और दूसरे देशोंका चाल चलन जुदा होनेकी कठिनाई से पूरा तर्जुमा करनेके बदले कहीं, कहीं भावार्थ ले लिया गया है। अब इस पुस्तकके गुणदोषों पर विशेष विचार करनेंका काम बुद्धिमानोंकी बुद्धिपर छोड़कर मैं केवल इतनी बात निवेदन किया चाहता हूँ कि कृपाकरके कोई महाशय पूरी पुस्तक बांचे बिना अपना बिचार प्रकट करनेंकी जल्दी न करें और जो सज्जन इस विषयमैं अपना बिचार प्रकट करें वह कृपाकर

This item is Non-Returnable

Details

  • ISBN-13: 9789356825413
  • ISBN-10: 9356825416
  • Publisher: Prabhakar Prakashan Private Limited
  • Publish Date: December 2024
  • Dimensions: 8.5 x 5.5 x 0.48 inches
  • Shipping Weight: 0.55 pounds
  • Page Count: 210

Related Categories

You May Also Like...

    1

BAM Customer Reviews