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म : ुद्दा गरम है । ( Mudda Garm Hai )
Overview
व्यक्ति वह सामाजिक प्राणी है जिसे ईश्वर ने सोचने, समझने और अपने विचारों को तार्किक आधार पर अभिव्यक्त करने की विशेष योग्यता प्रदान की है । यदि हमारे तर्कों में आधार, दूसरे के विचारों के प्रति सम्मान, सुनने का धैर्य और वैचारिक स्वीकृति का साहस हो तो फिर आपसी वाद-विवाद से अनेक समस्याओं का बेहतर समाधान तलाश किया जा सकता है । विद्यार्थियों में इसी तार्किक योग्यता का विस्तार करने के उद्देश्य से इस पुस्तक की परिकल्पना ने विस्तार लिया । निःसंदेह ये आरंभ है, अंत नहीं । इन विचारों में सुझाव और विस्तार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं । अतः तर्क सहित वैचारिक आलोचना विषय को विस्तार ही प्रदान करेगी और यही इस लेखन का उद्देश्य है । धन्यवाद सहित ।
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Details
- ISBN-13: 9789356104693
- ISBN-10: 9356104697
- Publisher: Pencil
- Publish Date: April 2022
- Dimensions: 8 x 5 x 0.21 inches
- Shipping Weight: 0.23 pounds
- Page Count: 88
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