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&#2360|Sadhvi Hemswaroopa

स : ंस्कृत संधि हैंडबुक

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Overview

संधि (सम् + धि) शब्द का अर्थ है 'योग अथवा मेल' । दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो परिवर्तन होता है उसे संधि कहते हैं । कई बार इस नये शब्द को अलग ही लिखा जाता है बिना जोड़े, किंतु वर्तनी में कुछ परिवर्तन जरूर हो जाता है ।


याद रहे की संस्कृत-हिंदी में जो बोला जाता है वही लिखा जाता है, स्वाभाविक सरलता से बोलने को ही संधि कहते हैं ।


1.4.109 परः सन्निकर्षः संहिता । अष्टाध्यायी में वर्णों की अत्यन्त समीपता को संहिता या संधि कहा गया है । संधि = उपसर्ग सम् + धा धातु ।

विशेष रूप से इसका मतलब है दो निकटवर्ती वर्ण

  • जो एक ही शब्द के भीतर हों, या
  • पहले शब्द का अन्तिम अक्षर तथा दूसरे शब्द का आदि अक्षर


उदाहरण (उदा०)

संहिता = सम् + हिता । संधि के कारण मकार का अनुस्वार में परिवर्तन हुआ है शब्द के भीतर ।

नमः ते = नमस्ते । संधि के कारण विसर्ग का सकार में परिवर्तन हुआ है तथा इन दो शब्दों को जोड़ कर नया शब्द बना है ।

शव आसन = शवासन । योग में हम निश्चिंत लेटने को शवासन के नाम से जानते हैं, यह दो शब्दों की संधि है ।


इस पुस्तक में हर प्रकार की संस्कृत की संधियों को सरल हिंदी भाषा में दर्शाया गया है ।

1. अच् सन्धि या स्वरसंधि

2. हल् सन्धि या व्यंजनसंधि

3. विसर्ग सन्धि

4. अनुस्वार सन्धि

5. विशिष्ट सन्धि


हर संधि का पाणिनि की अष्टाध्यायी से सुत्र दिया है । माहेश्वर सूत्र से प्रत्याहारों का विवरण, संधि को समझने की मूल बातें, संधि लगाने का गणितीय क्रमश, इन बातों से विद्यार्थियों के लीये अति प्रेरक व सुलभ पुस्तक तैयार की है ।

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Details

  • ISBN-13: 9789392201059
  • ISBN-10: 9392201052
  • Publisher: Devotees of Sri Sri Ravi Shankar Ashram
  • Publish Date: January 2022
  • Dimensions: 9 x 6 x 0.28 inches
  • Shipping Weight: 0.41 pounds
  • Page Count: 132

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