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&#2330|रक्तबì

च : ाँद की चौंतीस परछाईयाँ

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Overview

जब अपने भीतर भावनाओं का एक तीव्र प्रवाह उठता है तो शब्दों के जालों में से उनकी तीव्रता को कम करते हुए कविता प्रकट होती है। कविता लिखना ऐसा जैसे महादेव का माँ गंगा के तीव्र प्रवाह को अपनी जटाओं में समा के उनकी क्षमता और सम्भावना को एक उचित दिशा देना। तो बस इस चाँद की चौंतीस परछाईयों के प्रथम अध्याय में ऐसी ही ३४ कवितायेँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। कविताओं के चयन में प्रयास किया है कि विविध विषयों को समाहित किया जाए। यदि आपको अच्छी लगी तो बाकी परछाईयाँ भी टुकड़ों टुकड़ों में आपके सामने रक्खी जाएँगी।

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Details

  • ISBN-13: 9789370926844
  • ISBN-10: 9370926844
  • Publisher: Bookleaf Publishing
  • Publish Date: June 2025
  • Dimensions: 8 x 5 x 0.12 inches
  • Shipping Weight: 0.15 pounds
  • Page Count: 58

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