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"item_description" : "यह काव्य-संग्रह मानव की जीवन-यात्रा और उसके अंतर्मन के द्वंद्वों को रेखांकित करता है। 'अनुभूति' और 'कोऽहम्' जैसी रचनाएँ अस्तित्ववादी संकट और आत्म-साक्षात्कार के दर्शन को उजागर करती हैं और 'संकल्प' और 'जीवन' जैसी कविताएँ मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में कर्मयोगी बनने की प्रेरणा देती हैं। इसमें बचपन की निश्छल स्मृतियों से लेकर वृद्धावस्था के महा-आलोक तक के पाँचों पड़ावों को पिरोया गया है। 'सत्ता' और 'जागृति' जैसी कविताओ के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। 'माँ, तेरे हाथों का जादू' और 'अंतिम अभिसार' की पंक्तियाँ वात्सल्य और विदाई के कोमल भावों से मन को भिगो देती हैं। यह संग्रह निराशा के तिमिर को चीरकर आशा और पुरुषार्थ की किरण जगाने वाली एक काव्य-यात्रा है।",
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Overview
यह काव्य-संग्रह मानव की जीवन-यात्रा और उसके अंतर्मन के द्वंद्वों को रेखांकित करता है। 'अनुभूति' और 'कोऽहम्' जैसी रचनाएँ अस्तित्ववादी संकट और आत्म-साक्षात्कार के दर्शन को उजागर करती हैं और 'संकल्प' और 'जीवन' जैसी कविताएँ मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में कर्मयोगी बनने की प्रेरणा देती हैं। इसमें बचपन की निश्छल स्मृतियों से लेकर वृद्धावस्था के महा-आलोक तक के पाँचों पड़ावों को पिरोया गया है। 'सत्ता' और 'जागृति' जैसी कविताओ के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। 'माँ, तेरे हाथों का जादू ' और 'अंतिम अभिसार' की पंक्तियाँ वात्सल्य और विदाई के कोमल भावों से मन को भिगो देती हैं। यह संग्रह निराशा के तिमिर को चीरकर आशा और पुरुषार्थ की किरण जगाने वाली एक काव्य-यात्रा है।
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Details
- ISBN-13: 9789375278054
- ISBN-10: 9375278050
- Publisher: Bookleaf Publishing
- Publish Date: May 2026
- Dimensions: 8 x 5 x 0.2 inches
- Shipping Weight: 0.23 pounds
- Page Count: 96
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