menu
{ "item_title" : "भ", "item_author" : [" Mohanlal Gupta "], "item_description" : "इस ग्रंथ में मुगल काल में बने प्रमुख भवनों के इतिहास एवं स्थापत्य सम्बन्धी विशेषताओं को लिखा गया है। मुगल युग की वास्तुकला के सर्वांगीण विकास का कारण मुगलों में शानो-शौकत के प्रदर्शन की प्रवृत्ति, शिल्प आदि कलाओं के प्रति उनकी अभिरुचि, राजकोष की समृद्धि तथा संसाधनों की विपुल उपलब्धता माना जाता है। इस कारण बाबर से लेकर औरंगजेब तक के मुगल शासकों ने भारत में महत्वपूर्ण भवन बनाए तथा बड़ी संख्या में हिन्दू भवनों को मुगल-शैली में ढाला। इस काल में बादशाहों के साथ-साथ उनकी बेगमों, वजीरों, शहजादों, शहजादियों तथा अन्य लोगों ने भी बड़ी संख्या में छोटे-बड़े भवन बनाए थे। उनमें से बहुत से भवन एवं उद्यान अब काल के गाल में समा चुके हैं तथा बहुत कम भवन ही अपनी गवाही स्वयं देने के लिए उपलब्ध हैं। ये भवन भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांगलादेश आदि देशों में मिलते हैं। मुगलकाल में ये समस्त क्षेत्र भारत के ही अंग थे। इसलिए इस पुस्तक में वहाँ के भी प्रमुख मुगल भवनों को सम्मिलित किया गया है। पुस्तक के अंत में पाठकों की सुविधा के लिए मुुगलों के शासन-काल में विध्वंस किए गए हिन्दू-स्थापत्य की भी संक्षिप्त जानकारी दी गई है ताकि पाठकों को उस युग कì", "item_img_path" : "https://covers3.booksamillion.com/covers/bam/8/19/379/854/8193798546_b.jpg", "price_data" : { "retail_price" : "19.99", "online_price" : "19.99", "our_price" : "19.99", "club_price" : "19.99", "savings_pct" : "0", "savings_amt" : "0.00", "club_savings_pct" : "0", "club_savings_amt" : "0.00", "discount_pct" : "10", "store_price" : "" } }
&#2349|Mohanlal Gupta

भ : ारत के मुगलकालीन प्रमुख

local_shippingShip to Me
In Stock.
FREE Shipping for Club Members help

Overview

इस ग्रंथ में मुगल काल में बने प्रमुख भवनों के इतिहास एवं स्थापत्य सम्बन्धी विशेषताओं को लिखा गया है। मुगल युग की वास्तुकला के सर्वांगीण विकास का कारण मुगलों में शानो-शौकत के प्रदर्शन की प्रवृत्ति, शिल्प आदि कलाओं के प्रति उनकी अभिरुचि, राजकोष की समृद्धि तथा संसाधनों की विपुल उपलब्धता माना जाता है। इस कारण बाबर से लेकर औरंगजेब तक के मुगल शासकों ने भारत में महत्वपूर्ण भवन बनाए तथा बड़ी संख्या में हिन्दू भवनों को मुगल-शैली में ढाला। इस काल में बादशाहों के साथ-साथ उनकी बेगमों, वजीरों, शहजादों, शहजादियों तथा अन्य लोगों ने भी बड़ी संख्या में छोटे-बड़े भवन बनाए थे। उनमें से बहुत से भवन एवं उद्यान अब काल के गाल में समा चुके हैं तथा बहुत कम भवन ही अपनी गवाही स्वयं देने के लिए उपलब्ध हैं। ये भवन भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांगलादेश आदि देशों में मिलते हैं। मुगलकाल में ये समस्त क्षेत्र भारत के ही अंग थे। इसलिए इस पुस्तक में वहाँ के भी प्रमुख मुगल भवनों को सम्मिलित किया गया है। पुस्तक के अंत में पाठकों की सुविधा के लिए मुुगलों के शासन-काल में विध्वंस किए गए हिन्दू-स्थापत्य की भी संक्षिप्त जानकारी दी गई है ताकि पाठकों को उस युग कì

This item is Non-Returnable

Details

  • ISBN-13: 9788193798546
  • ISBN-10: 8193798546
  • Publisher: Shubhada Prakashan Jodhpur
  • Publish Date: December 2019
  • Dimensions: 9 x 6 x 0.43 inches
  • Shipping Weight: 0.61 pounds
  • Page Count: 202

Related Categories

You May Also Like...

    1

BAM Customer Reviews